कांवड़ मेले की आड़ में ‘हरा सोना’ साफ: बस्ती के सुकरौली में वन दरोगा और पुलिस की मिलीभगत से धड़ल्ले से कटे सागौन के पेड़
मामले की गंभीरता को देखते हुए रामनगर की विवादित रेंजर सोनल वर्मा और विभागीय उड़ाका दल (Flying Squad) को ग्राम पंचायत सुकरौली में कटी सागौन की लकड़ी के बारे में आधिकारिक सूचना दे दी गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रेंजर सोनल वर्मा ने सुबह स्थलीय जांच कर सख्त वैधानिक कार्रवाई करने की बात कही है।
अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी और वन विभाग की साठगांठ? कांवड़ मेले की आड़ में बस्ती में धड़ल्ले से कटे सागौन के हरे-भरे पेड़
- जब रक्षक ही बन गए भक्षक! प्रशासनिक व्यस्तता का फायदा उठाकर लकड़ी माफियाओं ने उजाड़ा सागौन का बाग
- खाकी और वन विभाग की सांठगांठ बेनकाब: गौर क्षेत्र में अवैध कटान, रेंजर के सख्त एक्शन के दावों पर टिकी निगाहें
- रास्ते बंद होने से बचा कुचा वन: कांवड़ यात्रा की बंदिशों के कारण पूरी लकड़ी ठिकाने लगाने में फेल रहे माफिया, मौके पर पड़े सबूत
- बस्ती में वन माफियाओं का दुस्साहस चरम पर: वन दरोगा अजय कुमार भारती की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
बस्ती: वन रेंज रामनगर के सुकरौली गांव में लकड़ी माफियाओं का दुस्साहस चरम पर, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल।
जब पूरा जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पवित्र कांवड़ यात्रा और कांवड़ मेले की सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में दिन-रात मुस्तैद था, ठीक उसी समय बस्ती जिले के रामनगर वन रेंज के अंतर्गत गौर क्षेत्र में एक बड़ा खेल चल रहा था। एक तरफ जहां अधिकारी कानून-व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में व्यस्त थे, वहीं दूसरी तरफ लकड़ी माफिया प्रकृति के सीने पर आरे चलाकर कीमती सागौन के पेड़ों को जमींदोज करने में मस्त थे।
रक्षक ही बन गए भक्षक: वन दरोगा और पुलिस पर गंभीर आरोप
विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिल रही खबर के अनुसार, ग्राम पंचायत सुकरौली में हुई इस अंधाधुंध कटान के पीछे गौर के वन दरोगा अजय कुमार भारती और गणेशपुर चौकी पुलिस की सीधी मिलीभगत बताई जा रही है। पर्यावरण संरक्षण का जिम्मा जिन कंधों पर था, वही कथित तौर पर सांठगांठ के जरिए माफियाओं के संरक्षक बन बैठे। सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर हरे-भरे सागौन के बाग को चंद रुपयों के लालच में नेस्तनाबूद कर दिया गया?
कांवड़ यात्रा की बंदिशें बनीं रुकावट, मौके पर मौजूद है सबूत
माफियाओं के नापाक मंसूबों को तब झटका लगा जब कांवड़ यात्रा के चलते चारों तरफ के रास्ते बंद कर दिए गए। रूट डायवर्जन और सुरक्षा बंदिशों के कारण लकड़ी माफिया पूरी कटी हुई लकड़ी को रातों-रात ठिकाने लगाने में सफल नहीं हो सके। नतीजा यह हुआ कि कुछ लकड़ी तो वे चुपचाप खिसकाने में कामयाब रहे, लेकिन भारी मात्रा में कीमती सागौन के लट्ठे आज भी मौके पर बेबस पड़े हुए हैं।
“सुबह मौके पर जांच कराई जाएगी और सागौन के पेड़ों की अवैध कटान के इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
— सोनल वर्मा, रेंजर, रामनगर
रेंजर और उड़ाका दल तक पहुंची सूचना
मामले की गंभीरता को देखते हुए रामनगर की रेंजर सोनल वर्मा और विभागीय उड़ाका दल (Flying Squad) को ग्राम पंचायत सुकरौली में कटी सागौन की लकड़ी के बारे में आधिकारिक सूचना दे दी गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रेंजर सोनल वर्मा ने सुबह स्थलीय जांच कर सख्त वैधानिक कार्रवाई करने की बात कही है।
निष्कर्ष: क्या होगी ठोस कार्रवाई?
यह घटना न केवल वन संपदा की लूट को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय पुलिस और वन विभाग की कार्यशैली पर भी बड़ा बदनुमा दाग है। अब देखना यह होगा कि विभागीय अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति करते हैं या फिर इस अवैध कटान के पीछे छिपे ‘खाकी और माफिया’ के इस गठजोड़ पर सचमुच कोई कड़ा एक्शन लिया जाता है। क्षेत्र की जनता और पर्यावरण प्रेमियों की निगाहें अब सुबह होने वाली जांच पर टिकी हैं।
इस खबर में व्यक्त किए गए विचार संबंधित रिपोर्टर या सूत्रों के आधार पर हैं। इसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था की छवि को बिना आधार के धूमिल करना नहीं है, बल्कि जनहित के मुद्दों को उजागर करना है।











